अचानक नींद टूटी तो देखा घरी की सुई दस को छुके आगे भी बड़ चुकी है। बगल के बिस्तर पर समा अभी भी सो रही है। आज फिर सुबह का नाश्ता गरम मिलने से रहा। गौरी दीदी को देर से आए लड़कियों का खाना गरम करके देने की इजाजत नहीं ।
" समा उठ यार। "समा परे परे सोती रही। कल रात बड़ी देर से सोए हम। रात नहीं सुबह ही कहना सही रहेगा। हॉस्टल में नई लड़की आई है दूसरे माले पे, राखी । फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाली लड़की ।
शालिनी का ब्रेकअप हो गया तो हम पहले माले पे पार्टी मना रहे थे। समा राखी को बुलाने गयी तो वो बोली पढ़ना है।
समा राखि से बोली "चल अभी। नीचे पार्टी हो रही है। हॉस्टल की सभी लड़कियां है वहां। थोड़ी देर बाद पढ़ लेना।"राखी अकर कर बोली
"मुझे सालो साल एक ही क्लास में नहीं रहना। पार्टी करने से एग्जाम में नंबर नहीं आते दीदी। इसके लिए पढ़ना पड़ता है"
दरअसल समा की ईयर बैक लगी थी। यानी थी तो वो राखी से सीनियर लेकिन इस साल भी राखी के साथ ही फर्स्ट ईयर में पढ़ने वाली थी। समा उस वक्त कुछ नहीं बोली। चुपचाप नीचे चली गई। वो पड़ती रही।
नीचे मस्ती का माहौल था। डांस गाना। पता नही हम शालिनी का दिल बहला रहे थे या ब्रेकअप का जश्न मना रहे थे।
' दिल पे पत्थर रखके मैंने मेकअप कर लिया,मेरे सैयाजी से आज मैंने ब्रेकअप कर लिया ...... '
कोई एक घंटी भी लेके आई थी। मानो बॉयफ्रेंड नहीं भूत भगाने का कार्यक्रम चल रहा हो। इसी बीच किसीने भूतो की बात छेर दी। हमारा हॉस्टल भूतिया है वागैरा वगैरा । बात छेरते ही सब अपनी अपनी कहानी सुनाने लगी। किसको या दिखाई परा है, किसको रात में छन छन की आवाज आई है, किसीको पानी के जग में किसिकी शक्ल दिखाई परी है और भी बहत कुछ। राखी दौड़ते हुए नीचे आ गई और हमारे पास बैठ गई। थोड़ी घबराए हुई । हमने पूछा क्या हुआ तो बोली के पढ़ाई में मन नहीं लगी तो नीचे आ गई।
कुछ तो गरबर है। उसकी बातो पे हमें यकीन न आया। इधर महफ़िल में कहानियां जारी थी। डांस गाने का माहौल अब भूतो की कहानियों ने ले ली थी। राखी चुपचाप सुनती रही। किसीको बाथरूम में भूतो का एहसास हुआ तो किसीने यह तक कह डाला हमारे हॉस्टल की मालकिन ही सायद चुड़ैल है जिस बात को हम सभी ने तहे दिल से स्वीकारा। हम राखी से पूछने लगे कि उसे कोई एहसास हुआ है क्या। फिर उसने मुंह खोला के अभी अभी जब वो दूसरे माले पे अपने कमरे में पढ़ रही थी तो उसकी बंद खिड़की के बाहर से कोई बुला रहा था। खिड़की ठोक रहा था। साथ ही छन् छन् की आवाज आ रही थी।
" मैंने जब खिड़की खोली तो कोई न था। बंद किए तो फिर आवाजे। छन् छन् खट खट। फिर खिड़की खोली तो कोई नहीं। मैं भाग के आ गई दीदी"
हमने भी गोल गोल आंखो से उसकी बातें सुनते और चटकारे लेते।
"तूने भी सुनी ऐसी आवाजे ? "
राखी ने सर हिलाकर हा बोलि ।"तुझसे पहले जो लड़की उस कमरे में थी उसने भी ऐसी आवाजे सुनी थी। उसने हॉस्टल की आंटी को भी बताया था पर उन्होंने तो बात टाल दी। अगले दिन सुबह वो कमरे में बेहोश मिली थी। उसके घर वाले आकर उसे हॉस्टल से लेके गए थे"
राखी रोने लगी।उसका तो दिल बैठ गया। बहुत घबरा गई। रोते रोते बोली
" मै नहीं रहूंगी यहां। ऐसी जगह पे कैसे रहूं जहां भूतो का बसेरा हो। मैं पापा को कॉल करके अभी बताती हूं के मुझे ले चले यहां से।"
हम उसे समझाने लगे के अभी घर पे रोते हुए बात करेगी तो वहां सभी बहत चिंता करेंगे ।किसी तरह समझा के उसे शांत किया।पर हम भी बड़े अचरज मे थे के ये क्या हुआ। पर असली माजरा तो किसी और ने रचाया था जो जानने के बाद मेरी और समा की हसी नहीं रुक रही थी।
जब हम नीचे मस्ती कर रहे थे तो समा तीसरी मंजिल के हमारे कमरे में गई थी। उसी के ठीक नीचे राखी का कमरा है। समा ने एक डिब्बी को छेद कर उसमे लंबी रस्सी बाधी। अंदर कुछ पैसे भर के डिब्बी लगाई और ऊपर से लटका के राखी के कमरे की खिड़की के पास लटका के खिड़की पे मारने लगी। खट खट और साथ में पैसों की छन् छन्। राखी आवाज के साथ खिड़की खोलती तो डिब्बी ऊपर खींच लेती। फिर आवाज। राखी को लगा भूत है। सुन के हमारी हसी का ठीकाना नही।लेकिन ह्म जब बात कर हि रहे थे अचानक पुजा आकर ह्मसे बोलि के दिब्या
कहि नहि दीखाई दे रही है.............................
